छत्तीसगढ़

महादेव सट्टा कांड की परछाईं फिर लौटी, सट्टा सिंडिकेट पर पुलिस की बड़ी चोट

Shantanu Roy
1 Feb 2026 6:44 PM IST
महादेव सट्टा कांड की परछाईं फिर लौटी, सट्टा सिंडिकेट पर पुलिस की बड़ी चोट
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कांकेर का हेड कॉन्स्टेबल सस्पेंड
Rajnandgaon. राजनांदगांव। करीब 6000 करोड़ रुपये के कुख्यात महादेव ऑनलाइन सट्टा कांड की गूंज एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति और पुलिस तंत्र में सुनाई देने लगी है। इस बार मामला राजनांदगांव से जुड़ा सामने आया है, जहां उभर रहे एक नए ऑनलाइन सट्टा सिंडिकेट को पुलिस मुख्यालय की सतर्कता से शुरुआती दौर में ही रोक दिया गया। इस कार्रवाई के केंद्र में कांकेर जिले में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल विजय कुमार पांडे हैं, जिन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कांकेर और राजनांदगांव से मिले इनपुट के बाद पुलिस के शीर्ष नेतृत्व ने असाधारण तेजी दिखाते हुए संभावित सट्टा नेटवर्क को पनपने से पहले ही कुचल दिया। यह कार्रवाई इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि विजय पांडे का नाम पहले से ही महादेव सट्टा ऐप कांड की जांच में सामने आ चुका है।
नए सट्टा सिंडिकेट की आहट से हड़कंप
हाल के दिनों में पुलिस मुख्यालय को इनपुट मिला था कि राजनांदगांव जिले में कुछ पुराने सट्टा नेटवर्क से जुड़े लोग दोबारा सक्रिय होने की कोशिश कर रहे हैं। बताया गया कि यह नेटवर्क ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सट्टा कारोबार को नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी में था। इनपुट में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क को “इनसाइड सपोर्ट” मिल रहा है, जिससे कार्रवाई से बचने की रणनीति बनाई जा रही थी। इन्हीं सूचनाओं में कांकेर में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल विजय कुमार पांडे का नाम सामने आया, जिन पर कथित तौर पर सट्टा संचालकों और पुलिस तंत्र के बीच संपर्क सूत्र यानी “लायज़ॉन” की भूमिका निभाने का आरोप है।
शीर्ष पुलिस नेतृत्व की सीधी दखल
सूत्रों के अनुसार, मामला सीधे पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (इंटेलिजेंस) अमित कुमार तक पहुंचा। इनपुट में यह बात सामने आई कि विजय पांडे हाल के दिनों में कुछ ऐसे राज्य पुलिस सेवा (SPS) अधिकारियों के संपर्क में थे, जिनका तबादला रायपुर से राजनांदगांव हुआ है। आरोप है कि सट्टा संचालकों से ‘प्रोटेक्शन मनी’ लेकर उन्हें कार्रवाई से राहत दिलाने की कोशिश की जा रही थी। इन गंभीर आशंकाओं को देखते हुए कांकेर एसपी निखिल राखेचा ने बिना देरी किए विजय पांडे को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।
निलंबन के बाद अचानक गायब
विजय पांडे का निलंबन अपने आप में बड़ी कार्रवाई थी, लेकिन इसके तुरंत बाद उनका अचानक संपर्क से बाहर हो जाना पुलिस मुख्यालय के लिए चिंता का विषय बन गया। सूत्रों का कहना है कि निलंबन आदेश के बाद पांडे न तो अपने निर्धारित स्थान पर मिले और न ही उनका मोबाइल सक्रिय रहा। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस मुख्यालय ने कांकेर और राजनांदगांव दोनों जिलों को हाई अलर्ट पर रखा है। कांकेर एसपी को पांडे की मौजूदा स्थिति और मूवमेंट की जानकारी तत्काल देने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि राजनांदगांव एसपी अंकिता शर्मा को जिले में सतर्क निगरानी रखने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने को कहा गया है।
महादेव कांड से पुराना नाता
विजय कुमार पांडे का नाम महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप कांड में नया नहीं है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की जांच के दौरान पांडे का नाम 2021 की एक विवादित दुबई यात्रा से जुड़ा था। बताया गया था कि इस यात्रा के दौरान पांडे ने महादेव ऐप के प्रमोटर्स रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर से मुलाकात की थी। विवाद इस बात को लेकर है कि यह यात्रा बिना पूर्व अनुमति के की गई और बाद में इसके लिए ‘एक्स पोस्ट फैक्टो’ यानी यात्रा के बाद मंजूरी ली गई।
संदिग्ध ‘मौखिक आदेश’ और भूमिका
जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, उस समय विजय पांडे कांकेर के डिस्ट्रिक्ट क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (DCRB) में पदस्थ थे। उन्हें एक प्रभावशाली वरिष्ठ अधिकारी के साथ बिना किसी लिखित आदेश के मौखिक रूप से अटैच किया गया था। यही पहलू आज भी जांच एजेंसियों के लिए संदेह का बड़ा कारण बना हुआ है। सूत्रों का दावा है कि जिस वरिष्ठ अधिकारी के साथ पांडे जुड़े थे, उनका नाम भी ईडी की जांच में महादेव सट्टा सिंडिकेट से कथित ‘प्रोटेक्शन मनी’ लेने के आरोपों में सामने आया है।
ईडी के बयान में अहम कड़ी
प्रवर्तन निदेशालय द्वारा 22 अगस्त 2023 को दर्ज किए गए सेक्शन 50 के बयान में चंद्रभूषण वर्मा ने विजय कुमार पांडे का नाम साफ तौर पर लिया था। वर्मा के अनुसार, पांडे उस समूह का हिस्सा थे जो 2021 में दुबई गया था और जिसने सट्टा नेटवर्क को संरक्षण देने में भूमिका निभाई। यह बयान ईडी की पहली प्रोसिक्यूशन कंप्लेंट में RUD-39 के रूप में विशेष पीएमएलए कोर्ट में पेश किया गया है। ताज़ा घटनाक्रम के बाद यह मामला अब सिर्फ राज्य पुलिस तक सीमित नहीं रहा। सूत्रों के अनुसार, सीबीआई और ईडी दोनों ही एजेंसियां इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। विजय पांडे के निलंबन और उसके बाद ग़ायब होने की सूचना केंद्रीय एजेंसियों तक पहुंच चुकी है। अधिकारियों का मानना है कि यह कार्रवाई महादेव सट्टा कांड की अधूरी कड़ियों को जोड़ने का मौका बन सकती है, खासकर उन वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर, जिन्होंने ‘एक्स पोस्ट फैक्टो’ विदेशी यात्रा को मंजूरी दी थी।
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